Sunday, December 23, 2012

अलविदा 201२, स्वागतम 201३

MOHD SALEEM
बीत गया जो साल भूल जाएँ, उस नये साल को गले लगाये
करते हैं दुआ हम रब्ब से सर झुका के, इस साल के सारे सपने पूरे हो आपके!
नया साल मुबारक हो
जाने वाले साल को प्यारी सी विदाई, आने वाले साल को सलाम, फ ूल का गुलदस्ता नहीं कागज़ पर सपना हैं नया साल मुबारक हो यही मेरी तमन्ना है, नया साल 201३ मुबारक
ÓÓÓÓÓÓÓÓÓÓÓÓÓÓÓÓÓÓÓÓÓÓ
मुझे माफ कर दो। एक बूरी खबर है। मैं आपको छोड़कर जा रहा हूं। मुझे अब भूल जाना। कुछ दिनों बाद मैं चला जाऊंगा और फिर आपको कभी नजर नहीं आऊंगा। तुम्हारा अपना 201२
ÓÓÓÓÓÓÓÓÓÓÓÓÓÓÓÓÓÓÓÓÓÓ
आ गले लग जा मेरे यार, दे दूँ जादू की झप्पी दो चार!
ऐसे ही कट जाये जि़न्दगी विदाउट एनी रिस्क
इस उम्मीद के साथ आपको नव वर्ष की शुभकामनायें
ÓÓÓÓÓÓÓÓÓÓÓÓÓÓÓÓÓÓÓÓÓÓ
सुनहरी धूप बरसात के बाद, थोड़ी सी हंसी हर बात के बाद,
उसी तरह हो मुबारक आपको 201३, 201२ के बाद!
आपको नव वर्ष की शुभकामनायें।

Tuesday, November 20, 2012

यूपी में नहीं मनीला में पैदा हुई 700 करोड़वीं संतान

दुनिया की आबादी 700 करोड़ हो गई है। दुनिया की 700 करोड़वीं संतान पैदा हो गई है। संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक ये संतान फिलिपींस की राजधानी मनाली के जोस फैबिला मेमोरियल अस्पताल में पैदा हुआ है और ये लड़की है। बच्ची का नाम डानिका मे कामाचू रखा गया है। बच्ची का वजन ढाई किलो है। पहले संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष का अनुमान था कि सात अरबवां बच्चा भारत के उत्तर प्रदेश में पैदा होने वाला है। यूपी के दो शहर लखनऊ और बागपत से इस बात के दावे भी उभरकर सामने आए थे। लेकिन बाजी मनीला ने मार ली और लखनऊ, बागपत पीछे रह गए। बागपत में बच्चा पैदा होने से पहले ही मिठाइयां बांटी जा रही थीं। लोग खुशियां मना रहे थे। लोगों का कहना था कि सुन्हेडा गांव में इस बच्चे का जन्म होगा। गांव की पिंकी जिस बच्चे को जन्म देती उसके पैदा होते ही दुनिया की आबादी 7 अरब के आंकड़े को छू लेने वाली थी। मालूम हो कि जनसंख्या वृद्धि के हिसाब से भारत में हर मिनट 51 बच्चे पैदा होते हैं। 20 करोड़ की आबादी वाले यूपी में ये आंकड़ा हर मिनट 11 बच्चों का है। इसी के आधार पर अनुमान लगाया जा रहा था कि 7 अरबवां बच्चा यूपी में ही पैदा होगा।

क्यो मनाते हैं मुहर्रम?


मुहर्रम इस्लाम धर्म में विश्वास करने वाले लोगों का एक प्रमुख त्यौहार है। इस माह की बहुत विशेषता और महत्व है। सन् 680 में इसी माह में कर्बला नामक स्थान मे एक धर्म युद्ध हुआ था, जो पैगम्बर हजरत मुहम्म्द स0 के नाती तथा यजीद (पुत्र माविया पुत्र अबुसुफियान पुत्र उमेय्या) के बीच हुआ। इस धर्म युद्ध में वास्तविक जीत हजऱत इमाम हुसैन अ0 की हुई। पर जाहिरी तौर पर यजीद के कमांडर ने हजऱत इमाम हुसैन अ0 और उनके सभी 72 साथियों को शहीद कर दिया था। जिसमें उनके छ: महीने की उम्र के पुत्र हजऱत अली असगऱ भी शामिल थे और तभी से तमाम दुनिया के ना सिफऱ्  मुसलमान बल्कि दूसरी क़ौमों के लोग भी इस महीने में इमाम हुसैन और उनके साथियों की शहादत का ग़म मनाकर उनकी याद करते हैं। आशूरे के दिन यानी 10 मुहर्रम को एक ऐसी घटना हुई थी, जिसका विश्व इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान है। इराक स्थित कर्बला में हुई यह घटना दरअसल सत्य के लिए जान न्योछावर कर देने की जिंदा मिसाल है। इस घटना में हजरत मुहम्मद (सल्ल) के नवासे (नाती) हजरत हुसैन को शहीद कर दिया गया था। कर्बला की घटना अपने आप में बड़ी विभत्स और निंदनीय है। बुजुर्ग कहते हैं कि इसे याद करते हुए भी हमें हजरत मुहम्मद (सल्ल) का तरीका अपनाना चाहिए। जबकि आज आमजन को दीन की जानकारी न के बराबर है। अल्लाह के रसूल वाले तरीकों से लोग वाकिफ  नहीं हैं। ऐसे में जरूरत है हजरत मुहम्मद (सल्ल) की बताई बातों पर गौर करने और उन पर सही ढंग से अमल करने की जरुरत है। इमाम और उनकी शहादत के बाद सिर्फ उनके एक पुत्र हजरत इमाम जैऩुलआबेदीन, जो कि बीमारी के कारण युद्ध मे भाग न ले सके थे बचे। दुनिया मे अपने बच्चों का नाम हजऱत हुसैन और उनके शहीद साथियों के नाम पर रखने वाले अरबो मुसलमान हैं। इमाम हुसेन की औलादे जो सादात कहलाती हैं दुनियाभर में फैली हुयी हैं। जो इमाम जेनुलाबेदीन अ0 से चली।
बाक्स
Mohd Saleem
करबला, इराक की राजधानी बगदाद से 100 किलोमीटर दूर उत्तर-पूर्व में एक छोटा-सा कस्बा, जहां 10 अक्टूबर 680 (10 मुहर्रम 61 हिजरी) को युद्ध समाप्त हुआ।
इसमें एक तरफ  72 (शिया मत के अनुसार 123 यानी 72 मर्द-औरतें और 51 बच्चे शामिल थे) और दूसरी तरफ  40,000 की सेना थी, इस युद्ध में
हजरत हुसैन की फौज के कमांडर अब्बास इब्ने अली थे। उधर यजीदी फौज की कमान उमर इब्ने सअद के हाथों में थी।
हुसैन इब्ने अली इब्ने अबी तालिब
हजरत अली और पैगंबर हजरत मुहम्मद की बेटी फातिमा (रजि) के पुत्र।
जन्म- 8 जनवरी 626 ईस्वी ,मदीना,  सऊदी अरब ( 3 शाबान 4 हिजरी)
शहादत- 10 अक्टूबर 680 ई् (करबला) इराक) 10 मुहर्रम 61 हिजरी।

Friday, September 7, 2012

बगल में छोरा नगर में ढि़ढोरा


Sunday, August 26, 2012


   बच्‍चे को मोटापे से बचाना है? तो हटा दीजिए टीवी!         


अगर आप अपने बच्चों में मोटापे को लेकर परेशान है, तो यह सलाह आपके काम आ सकती है। युवाओं में मोटापे की रिकॉर्ड दर को देखते हुए एक ब्रिटिश विशेषज्ञ ने अभिभावकों को उनके बच्चों के कमरे से टीवी हटाने की सलाह दी है। समाचार पत्र च्डेली मेलज् ने अपनी रपट में बताया कि एक परियोजना में शामिल शिक्षाविदों के अनुसार नर्सरी के बच्चों को मोटापे से बचाने के लिए उन्हें टीवी कार्यक्रमों को देखने से रोकने की जरूरत है। च्टॉय बाक्सज् नाम के इस सर्वेक्षण से पता चला है कि यूरोपीय प्री-स्कूलर्स में मोटापा का रिकॉर्ड स्तर है। एथेन्स स्थित हरोकोपिओ विश्वविद्यालय के सहायक प्रोफेसर यानीस मेनिओस इस परियोजना के समन्वयक हैं। उन्होंने कहा, "हमें मोटापे से बचने के लिए नए दृष्टिकोण की जरूरत है। हमने पाया कि कई देशों में स्वस्थ भोजन और सक्रिय खेल पर स्पष्ट दिशा-निर्देशों की कमी है।" अभिभावकों की प्रेरणा से हो सकता है वजन कम उन्होंने बताया, "हालांकि अधिक समय तक बैठे रहने वाले व्यवहार के अनुवर्ती मोटापे के साथ जुड़े होने के अच्छे प्रमाण मिले हैं।" अधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक प्रत्येक पांच में एक बच्चा स्कूल की शुरुआत के वक्त मोटापाग्रस्त है। शिक्षाविदों ने पाया कि स्पेन में करीब ४०,००० प्री-स्कूल लड़कियों को मोटापाग्रस्त के रूप में वर्गीकृत किया गया है। चार वर्षों तक चले इस अध्ययन से यह भी पता चला है कि उत्तरी यूरोप में आठ में से एक बच्चा मोटापाग्रस्त है, जो दक्षिणी यूरोप से २५ प्रतिशत अधिक है।
Bilal Khan

Bilal Khan

Bilal Khan

Azam Khan

Add caption

Warisha Khan

Gazala Khan

Shahid Khan

Shahid Khan

Faisal Khan

Warisha Khan

Shahid Khan


   छू ली है जमीं अनारकली कुर्ता ने      

व्यक्तित्व में आकर्षण उत्पन्न करने के कई तरीके होते हैं। उनमें सबसे अहम् है हमारा पहनावा। विभिन्न मौकों पर अनुकूल पहनावा न सिर्फ हमें प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज कराने में मदद करता हैए बल्कि इससे हमारे भीतर आत्मविश्वास भी उत्पन्न होता है। इसलिए इस ओर ध्यान देना है बेहद जरूरी। जब ऐसी बात है तो फैशन को समझना भी है जरूरी। आजकल फैशन में है अनारकली कुर्ता। खास बात है कि इन दिनों ऐसे अनारकली कुर्ते अधिक पसंद किए जा रहे हैंए जिनकी लंबाई इतनी अधिक होती है कि चूड़ीदार भी नजर नहीं आती। यदि आपकी लंबाई ज्यादा है तो प्लेन कलर के कुर्ते में लंबाई और अधिक दिखेगी। ऐसे में संतुलन उत्पन्न करने के लिए आप कंट्रास्ट बॉर्डर वाला अनारकली कुर्ता चुन सकती हैं। स्लीव्स और गले में भी कंट्रास्ट कलर से डिजाइन अच्छी लगेगी। इसी प्रकार दुपट्टा भी कंट्रास्ट कलर में चुनें। पार्टी वेयर ड्रेस चाहिए तो भारी जरी के बार्डर वाला अनारकली कुर्ता चुन सकती हैं। अनारकली कुर्ता आपको हर अवसर के अनुकूल अहसास देगा। इसे आप न सिर्फ खास मौकों पर पहन सकती हैंए बल्कि घूमने.फिरने के दौरान पहनने लिए भी है यह परफेक्ट ड्रेस।

gazala khan

GazalaKhan

Gazala Khan


Gazala Khan

Gazala Khan

Gazala Khan

Bilal Khan

Bilal Khan

Bilala


Add caption


Bilal




आप कहीं मल्टीविटामिन के एडिक्ट तो नहीं
पच्चीस साल की अदिति अपने दिन की शुरुआत हेल्दी ब्रेकफास्ट की बजाए मल्टीविटामिन गोलियों से करती है। हर सुबह वह विटामिन की चार गोलियां लेती है। दोपहर में दो गोली और सोने से पहले एक गोली। अदिति का मानना है कि मल्टीविटामिन की ये गोलियां उसके शरीर के स्टामिना को और भी बढ़ाने में मदद करती हैं साथ में खूबसूरती को भी। मगर कुछ ही दिनों बाद अदिति को काम करते वक्त थकान महसूस होने लगी। डॉक्टरों से चेकअप कराने के बाद पता चला कि मल्टीविटामिन्स की गोलियों ने अदिति के शरीर को फायदे से ज्यादा नुकसान पहुंचाया था।बहुत से युवा आजकल मल्टीविटामिन एडिक्ट होने लगे हैं। अपने आप को चुस्त.दुरूस्तए ऊर्जा से भरपूर और खूबसूरत दिखने के लिए युवा मल्टीविटामिन पर भरोसा करने लगे हैं। इन दवाइयों का शरीर पर क्या असर होगाए इस बात की किसी को चिंता नहीं है। डॉक्टरों की राय मानेंए तो मल्टीविटामिन की गोलियां शरीर को फायदा कम और नुकसान अधिक पहुंचाती हैं। युवा अक्सर ये गोलियां अपनी मानसिक संतुष्टि के लिए खाते हैं। उन्हें लगता है कि ये गोलियां उनके शरीर के लिए बेहद फायदेमंद हैं। मगर डॉक्टरों का कहना है कि विटामिन की गोलियां किसी भी व्यक्ति को तब दी जाती हैंए जब वह बीमारी की हालत में हो और जरूरी पोषक तत्व शरीर में कम जा रहे हों और रोगी कमजोर महसूस कर रहा हो।मानसिक संतुष्टि के लिए अगर युवाओं को शुगर कोटेड गोली को भी विटामिन की गोली बता दी जाएए तो वे संतुष्ट हो जाते हैं और अच्छा महसूस करते हैं। उन्हें सिर्फ मल्टी.विटामिन गोली से मतलब होता है। जिसे खाकर उन्हें मानसिक शांति मिलती है। युवा अपनी लुक को चेकर काफी दबाव में रहते है। सुंदर और फिट दिखना युवाओं की पहली चाहत होती है। इसके लिए वे आंखें बंद कर मल्टीविटामिन की गोलियों पर भरोसा करते हैं। युवतियां भी अपने आप को सुंदर दिखाने के लिए मल्टीविटामिन को ही शर्ट.कट तरीका मानती हैं। मगर अंत में इन गोलियों के बुरे नतीजे भी उन्हें ही भुगतने पड़ते हैं। हर दिन लिया जाने वाला संतुलित डायट आपके शरीर को सभी पोषक तत्व देता है। किसी भी व्यक्ति को मल्टीविटामिन की गोलियां किसी खास अवस्था में ही डॉक्टर लेने के लिए कहते हैं। बिना डॉक्टरों की राय के किसी भी तरह की मल्टीविटामिन गोली लेना स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक होता है। कई विटामिन गोलियां ऐसी होती हैंए जो शरीर के लिए काफी हानिकारक होती हैं। अगर आप दूसरी दवाइयां ले रहे हैंए तो विटामिन ष्डीष्ए ष्ईष्ए ष्एष् और ष्केष् शरीर के लिए बेहद हानिकारक होता है। ये शरीर में जाकर जमा हो जाते हैं। विटामिन ष्एष् की अधिकता लीवर को नुकसान पहुंचाती है जबकि विटामिन ष्डीष् की अधिकता से हार्मोनल गड़बड़ी हो जाती है। विटामिन ष्ईष् को अक्सर त्वचा की खूबसूरती के लिए खाया जाता है। मगर शरीर में इसकी जरूरत से ज्यादा अधिकता आंतरिक ब्लीडिंग का कारण बनती है। बिना डॉक्टर की सलाह के विटामिन ष्केष् का सेवन त्वचा को फायदा की बजाए नुकसान पहुंचा सकता है। ऐसा भी हो सकता हैं कि त्वचा जवां दिखने की बजाए झुर्रियां दिखने लगे। इसलिए मल्टीविटामिन की गोलियां तभी तक लेंए जब तक डॉक्टर कहें। और फिर उन्हीं की सलाह से फौरन बंद भी कर दें।





आज की तालीम

GAZALA KHAN
आज की तालीम........अल्लाह तबारकव तआला ने खुद इर्शाद फरमाया है कि मेरी बारगाह में मांगी गई कोई भी दुआ जाया नहीं जाती। लेकिन मसलन जैसे- किसी ने अस्र की नमाज मंे दुआ की की फलां से मेरे 1000 का कर्जा मिल जाए और वह अस्र के बाद उसके पास चला गया लेकिन उसे रूपए नहीं मिले । अल्लाह पाक इर्शाद फरमाते हैं कि उस पैसे उस वक्त इस लिए नहीं मिले क्योंकि वह उसके हक में ठीक नहीं थे और उसकी दुआ का फायदा उसे ऐसे हुआ कि उसके हक में अस्र के बाद उसका एक्सीडेंट होना था लेकिन उसे उसकी उस दुआ ने उसे एक्सीडेट से बचा दिया। देखा अल्लाह पाक की बारगाह में कि गई दुआ का असर कहां से कहां जा कर कुबूल होता है।,,,,,,,,,,,,,,,, मसलन आप नमाज पढ़े और खुदा से इतनी मुहब्बत करों कि उसे आपसे मुहब्बत करने में मजबूर होना पड़े। 

Thursday, July 5, 2012

Saturday, April 28, 2012

पितृ भक्ति की मिसाल बना बेटा


Mohd Saleem
आज्ञाकारी बेटे की चर्चा सुनते ही जो नाम जेहन में सबसे पहले उभरता हैए वह है श्रवण कुमार का। जिन्होंने अपने दृष्टिबाधित माता.पिता की आज्ञा पर उन्हें कंधे पर बैठाकर तीर्थाटन कराया। यहां का एक बेटा बिना पिता के आदेश के ही 12 साल अतिरिक्त जेल में बिता दिया। उसने ठान लिया था कि जब तक उसके पिता जेल आकर उसे माफ नहीं करेंगे तब तक अपराध की सजा पूरी करने के बाद भी वह जेल से नहीं निकलेगा। दरअसल उस व्यक्ति को अपनी सौतेली मां से मारपीट के अपराध में तीन साल की कैद हो गई थी। सजा के दौरान वह इस बात से परेशान था कि इस प्रकरण से उसके पिता बहुत दुखी होंगे। लिहाजा सजा पूरी करने के बाद भी उसने खुद को दोषी माना। पिता की क्षमा प्रतीक्षा में यह व्यक्ति स्वेच्छा से 12 साल जेल में अतिरिक्त गुजारे।

Thursday, November 3, 2011

यूपी में नहीं मनीला में पैदा हुई 700 करोड़वीं संतान

GAZALA KHAN

दुनिया की आबादी 700 करोड़ हो गई है। दुनिया की 700 करोड़वीं संतान पैदा हो गई है। संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक ये संतान फिलिपींस की राजधानी मनाली के जोस फैबिला मेमोरियल अस्पताल में पैदा हुआ है और ये लड़की है। बच्ची का नाम डानिका मे कामाचू रखा गया है। बच्ची का वजन ढाई किलो है। पहले संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष का अनुमान था कि सात अरबवां बच्चा भारत के उत्तर प्रदेश में पैदा होने वाला है। यूपी के दो शहर लखनऊ और बागपत से इस बात के दावे भी उभरकर सामने आए थे। लेकिन बाजी मनीला ने मार ली और लखनऊ, बागपत पीछे रह गए। बागपत में बच्चा पैदा होने से पहले ही मिठाइयां बांटी जा रही थीं। लोग खुशियां मना रहे थे। लोगों का कहना था कि सुन्हेडा गांव में इस बच्चे का जन्म होगा। गांव की पिंकी जिस बच्चे को जन्म देती उसके पैदा होते ही दुनिया की आबादी 7 अरब के आंकड़े को छू लेने वाली थी। मालूम हो कि जनसंख्या वृद्धि के हिसाब से भारत में हर मिनट 51 बच्चे पैदा होते हैं। 20 करोड़ की आबादी वाले यूपी में ये आंकड़ा हर मिनट 11 बच्चों का है। इसी के आधार पर अनुमान लगाया जा रहा था कि 7 अरबवां बच्चा यूपी में ही पैदा होगा।

Tuesday, November 1, 2011

छठ: व्रत करने वालों ने दिया अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य

बिहार में आस्था के लोकपर्व छठ पर विभिन्न नदी, तालाबों, नहरों पर बने घाटों पर जाकर तथा घर की छतों और आवासीय प्रांगण में बनाए गए कुंड में लाखों की संख्या में व्रत करने वालों तथा श्रद्धालुओं ने आज 

<iframe width="420" height="315" src="http://www.youtube.com/embed/rB6hEt-QUYQ" frameborder="0" allowfullscreen></iframe>

अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया। पटना में गंगा नदी पर बने विभिन्न घाटों पर घुटने तक पानी में खड़े होकर छठ व्रत करने वालों और श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना की और डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया। प्रकृति पूजन के पर्व छठ को लेकर पूरे प्रदेश में श्रद्धालुओं के बीच धार्मिक श्रद्धा और उत्साह का माहौल है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार    izLrqfr
xtkyk [kku
और उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने गंगा में मोटरवोट पर सवार होकर घाटों का जायजा लिया और व्रत धारियों एवं श्रद्धालुओं को बधाई दी। छठ के मधुर गीतों के बीच पूरे प्रदेश में माहौल इन दिनों भक्तिमय हो गया है और हर तरफ हर्ष और उल्लास का वातावरण देखा जा रहा है। व्रत धारियों और श्रद्धालुओं के साथ विभिन्न घाटों पर पहुंचेच्बच्चे पटाखे फोड़ते देखे गए। गत 30 अक्टूबर को नहाय-खाय के साथ शुरू हुए चार दिनों के इस पर्व के दौरान कल खरना के बाद से आरंभ व्रत धारियों का उपवास आज भी जारी रहा और यह कल प्रातरू सूर्य को अर्घ्य देने के बाद प्रसाद ग्रहण करके समाप्त होगा।


Wednesday, October 19, 2011

गायब होती जा रही हैं ‘सोन चिरैया

GAZALA KHAN

भंवरों के अतिरिक्त एक चिड़िया भी है, जो सिर्फ फूलों का रस चूसती है। इसका नाम है ‘सोन चिरैया’। बुंदेलखंड में कहीं-कहीं इसे ‘श्याम चिरैया’ के नाम से भी जाना जाता है। अक्सर फुलवारियों में दिखने वाली यह चिड़िया अब गायब होती जा रही है। आमतौर पर भंवरे, मधुमक्खी और तितलियों को ही फूलों से निकलने वाले रस ‘मकरंद’ पर जीवित रहने वाला माना जाता है, लेकिन ‘सोन चिरैया’ या ‘श्याम चिरैया’ का भोजन भी सिर्फ फूलों का रस यानी ‘मकरंद’ है। पहले अक्सर ए चिड़िया फुलवारी (फूलों की बगिया) में दिख जाती थीं, लेकिन अब बहुत कम ‘सोन चिरैया’ नजर आती हैं। इस चिड़िया का वजन 10-20 ग्राम होता है। श्याम रंग की इस चिड़िया के गले में सुनहरी धारी होती है, जो सूर्य की किरण पड़ते ही सोने जैसा चमकती है। रंग और लकीर की वजह से ही इसे ‘सोन चिरैया’ या ‘श्याम चिरैया’ कहा जाता है। इसकी पूंछ भी चोंच की तरह नुकीली होती है और जीभ काले नाग की तरह। अपनी लम्बी जीभ को सांप की तरह बाहर-भीतर कर वह फूलों का रस चूसती है। कभी फूलों की खेती करने वाले बांदा जनपद के खटेहटा गांव के बुजुर्ग मइयाद्दीन माली कहते हैं, ‘सोन चिरैया का आशियाना फुलवारी है। बुंदेलखंड में फूलों की खेती अब बहुत कम की जाती है। यही वजह है कि इन चिड़ियों की संख्या में कमी आई है।’वहीं कुछ बुद्धिजीवियों का कहना है, ‘गांवों से लेकर कस्बों तक दूरसंचार की विभिन्न कम्पनियों ने टावरों का जाल बिछा दिया है। इनसे निकलने वाली किरणों की चपेट में आकर बड़े पैमाने पर चिड़ियों की मौत हो रही है। ‘सोन चिरैया’ की संख्या में कमी की यह बहुत बड़ी वजह है।’ 
प्रस्तुति 
गजाला खान
http://visharadtimes.com/

दुनिया के कुछ डरावने पर्यटन स्थल

GAZALA KHAN

जब शौक घूमने का हो तो क्या देश और क्या विदेश। कुछ जगहों पर घूमने पर लोगों को इतिहास की याद ताजा हो जाती है तो कुछ जगहों पर जाने के लिए लोग भावनाओं में बह जाते है। आगरा ताज प्यार की निशानी है जिसे देखने के लिए लोग दुनिया के कोने-कोने से आत है। इन सबसे इतर दुनिया में कुछ जगह ऐसी भी है जहां जाने पर डर लगता है और ये जगहें अपने आप में विचित्र भी है। लेकिन फिर भी लोग यहां पर रोमांच के लिए घूमने जाते है। जिनमें से कुछ जगहें ये हैं-
मटर म्यूजियम ऑफ मेडिकल हिस्टरी की स्थापना अमेरिका के फिलाडेल्फिया में 1858 में हुई थी।
यहां पर विचित्र प्रकार के पुराने चिकित्सकीय संसाधनों का कलक्शन है। यहां पर चिकित्सकीय विज्ञान से संबंधित कई ऐसे पुराने उपकरण रखे हुए है, जिनको देखने पर आश्चर्य होता है। इसके साथ ही यहां का सबसे डरावनी पहलू यह है कि यहां मानव खोपडियों का भी विशाल संग्रह है। जिसको देखने के लिए लोग डरावनी होने के बाद भी आते हैं।
मैक्सिको सिटी का सोनोरा मार्केट तंत्र-मंत्र और जादू-टोने के सामान मिलने के लिए प्रसिद्ध है। 
जादू-टोने में विश्वास करने वाले लोगों को यहां पर विचित्र प्रकार की चीजों जैसे मानवी खोपड़ी नुमा संरचना वाली आकृति की खरीददारी करते हुए खूब देखा जा सकता है। इन प्रकार की आकृतियों को देखकर कई बार डर भी लगता है, लेकिन फिर भी यहां के लोग मान्यता होने की वजह से इस मार्केट में आते है। यहां पर मान्यता है कि इस प्रकार की चीजों को घर में रखना घर तथा परिवारक लिए शुभ होता है। इसके साथ ही यहां पर दुर्लभ किस्म की जड़ी-बूटियों के साथ ही सांप का खून तथा सुखाया हुआ हमिंगबर्ड भी मिलता है।
पिट केरियन द्वीप के पास स्थित ईस्टर आइसलैंड अपनी विचित्रता और डरावने स्थल के लिए दुनियाभर में मशहूर है। जरा आप कल्पना कीजिए कि आप जिधर भी देखे आपको दूर-दूर तक पत्थर के बुत ही नजर आए। इन्हें देखने पर मन में डर पैदा होना तो लाजमी ही है, लेकिन फिर भी देश-विदेश से पर्यटक यहां पर घूमने के लिए आते है। ईस्टर द्वीप दुनिया की सबसे रहस्यमय जगहों में से एक है। ईस्टर आइसलैंड का स्पेनिश नाम ष्इसला डी पैसकुआष् है। यहां पर जुलाई और अगस्त के महीनों में तापमान कम होने पर सबसे अधिक पर्यटक देखे जा सकते है। 
अमेरिका के कैलिफोर्निया में स्थित विंचेस्ट हाउस का निर्माण 1884 में हुआ था। यह महल 38 साल में बनकर तैयार हुआ था। विंचेस्ट हाउस को भूत बंगले के तौर पर जाना जाता है। 160 कमरों वाला महलनुमा यह घर पर्यटकों को बरबस अपनी ओर आकर्षित करता है। जो लोग भूत-प्रेत में विश्वास करते है और जो नहीं भी करते दोनों तरह के लोग यहां पर मौज-मस्ती के लिए आते है। एक जमाने में यह सारा विंचेस्टर का घर था। लोगों का मानना है कि विंचेस्ट हाउस में सारा की आत्मा भटकती रहती है। विचेंस्ट हाउस के निर्माण में 1884 में करीब 55 लाख अमेरिकी डॉलर का खर्च आया था।
राजस्थान के देशनोक गांव का करणीमाता मंदिर 15वीं शताब्दी में बनकर तैयार हुआ था। इस मंदिर का मुख्य आकर्षण यहां पर खुले रूप से घूमने वाले चूहे है। इन चूहों को देखकर यहां आने वाले श्रद्धालुओं को अजीब तरह का डर भी लगता है। इस मंदिर में हजारों की संख्या में चूहे मुक्त रूप से घूमते रहते है, इन चूहों में कुछ सफेद चूहे भी है। सफेद चूहों को मान्यता से जोड़कर देखा जाता है। मंदिर के मुख्य द्वार पर लगा चांदी का विशालकाय गेट भी श्रद्धालुओं को खूब आकर्षित करता है। ब्रिटेन में स्थित मैरी किन वह स्थान है जहां की गलियां बीते दिनों की सच्चाइयों को उजागर करती है। यहां कभी प्लेग के शिकार लोगों को सडकों पर यूं ही लावारिस छोड़ दिया गया था और वे सही उपचार न मिलने के कारण तड़प-तड़प कर मर गए थे। अब यहां पर सैलानायों की भीड़ लगी रहती है। यूक्रेन के शेर्नोबिल में 26 अप्रैल, 1986 में हुई परमाणु सयंत्र दुर्घटना में हजारों लोग मारे गए थे। जिससे इसके आसपास का पूरा इलाका तहस-नहस हो गया था। दुर्घटना के बाद यह जगह पर्यटकों के लिए खोल दी गई थी। लोगों को यहां आकर उस भयावह त्रासदी की याद आ जाती है, लेकिन फिर भी पर्यटक यहां पर घूमने के लिए आते है। 
प्रस्तुति 
गजाला खान

http://visharadtimes.com/