Thursday, July 5, 2012
Saturday, April 28, 2012
पितृ भक्ति की मिसाल बना बेटा
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| Mohd Saleem |
आज्ञाकारी बेटे की चर्चा सुनते ही जो नाम जेहन में सबसे पहले उभरता हैए वह है श्रवण कुमार का। जिन्होंने अपने दृष्टिबाधित माता.पिता की आज्ञा पर उन्हें कंधे पर बैठाकर तीर्थाटन कराया। यहां का एक बेटा बिना पिता के आदेश के ही 12 साल अतिरिक्त जेल में बिता दिया। उसने ठान लिया था कि जब तक उसके पिता जेल आकर उसे माफ नहीं करेंगे तब तक अपराध की सजा पूरी करने के बाद भी वह जेल से नहीं निकलेगा। दरअसल उस व्यक्ति को अपनी सौतेली मां से मारपीट के अपराध में तीन साल की कैद हो गई थी। सजा के दौरान वह इस बात से परेशान था कि इस प्रकरण से उसके पिता बहुत दुखी होंगे। लिहाजा सजा पूरी करने के बाद भी उसने खुद को दोषी माना। पिता की क्षमा प्रतीक्षा में यह व्यक्ति स्वेच्छा से 12 साल जेल में अतिरिक्त गुजारे।
Thursday, November 3, 2011
यूपी में नहीं मनीला में पैदा हुई 700 करोड़वीं संतान
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| GAZALA KHAN |
दुनिया की आबादी 700 करोड़ हो गई है। दुनिया की 700 करोड़वीं संतान पैदा हो गई है। संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक ये संतान फिलिपींस की राजधानी मनाली के जोस फैबिला मेमोरियल अस्पताल में पैदा हुआ है और ये लड़की है। बच्ची का नाम डानिका मे कामाचू रखा गया है। बच्ची का वजन ढाई किलो है। पहले संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष का अनुमान था कि सात अरबवां बच्चा भारत के उत्तर प्रदेश में पैदा होने वाला है। यूपी के दो शहर लखनऊ और बागपत से इस बात के दावे भी उभरकर सामने आए थे। लेकिन बाजी मनीला ने मार ली और लखनऊ, बागपत पीछे रह गए। बागपत में बच्चा पैदा होने से पहले ही मिठाइयां बांटी जा रही थीं। लोग खुशियां मना रहे थे। लोगों का कहना था कि सुन्हेडा गांव में इस बच्चे का जन्म होगा। गांव की पिंकी जिस बच्चे को जन्म देती उसके पैदा होते ही दुनिया की आबादी 7 अरब के आंकड़े को छू लेने वाली थी। मालूम हो कि जनसंख्या वृद्धि के हिसाब से भारत में हर मिनट 51 बच्चे पैदा होते हैं। 20 करोड़ की आबादी वाले यूपी में ये आंकड़ा हर मिनट 11 बच्चों का है। इसी के आधार पर अनुमान लगाया जा रहा था कि 7 अरबवां बच्चा यूपी में ही पैदा होगा।Tuesday, November 1, 2011
छठ: व्रत करने वालों ने दिया अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य
बिहार में आस्था के लोकपर्व छठ पर विभिन्न नदी, तालाबों, नहरों पर बने घाटों पर जाकर तथा घर की छतों और आवासीय प्रांगण में बनाए गए कुंड में लाखों की संख्या में व्रत करने वालों तथा श्रद्धालुओं ने आज
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अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया। पटना में गंगा नदी पर बने विभिन्न घाटों पर घुटने तक पानी में खड़े होकर छठ व्रत करने वालों और श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना की और डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया। प्रकृति पूजन के पर्व छठ को लेकर पूरे प्रदेश में श्रद्धालुओं के बीच धार्मिक श्रद्धा और उत्साह का माहौल है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार izLrqfr
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और उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने गंगा में मोटरवोट पर सवार होकर घाटों का जायजा लिया और व्रत धारियों एवं श्रद्धालुओं को बधाई दी। छठ के मधुर गीतों के बीच पूरे प्रदेश में माहौल इन दिनों भक्तिमय हो गया है और हर तरफ हर्ष और उल्लास का वातावरण देखा जा रहा है। व्रत धारियों और श्रद्धालुओं के साथ विभिन्न घाटों पर पहुंचेच्बच्चे पटाखे फोड़ते देखे गए। गत 30 अक्टूबर को नहाय-खाय के साथ शुरू हुए चार दिनों के इस पर्व के दौरान कल खरना के बाद से आरंभ व्रत धारियों का उपवास आज भी जारी रहा और यह कल प्रातरू सूर्य को अर्घ्य देने के बाद प्रसाद ग्रहण करके समाप्त होगा।
Wednesday, October 19, 2011
गायब होती जा रही हैं ‘सोन चिरैया
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| GAZALA KHAN |

भंवरों के अतिरिक्त एक चिड़िया भी है, जो सिर्फ फूलों का रस चूसती है। इसका नाम है ‘सोन चिरैया’। बुंदेलखंड में कहीं-कहीं इसे ‘श्याम चिरैया’ के नाम से भी जाना जाता है। अक्सर फुलवारियों में दिखने वाली यह चिड़िया अब गायब होती जा रही है। आमतौर पर भंवरे, मधुमक्खी और तितलियों को ही फूलों से निकलने वाले रस ‘मकरंद’ पर जीवित रहने वाला माना जाता है, लेकिन ‘सोन चिरैया’ या ‘श्याम चिरैया’ का भोजन भी सिर्फ फूलों का रस यानी ‘मकरंद’ है। पहले अक्सर ए चिड़िया फुलवारी (फूलों की बगिया) में दिख जाती थीं, लेकिन अब बहुत कम ‘सोन चिरैया’ नजर आती हैं। इस चिड़िया का वजन 10-20 ग्राम होता है। श्याम रंग की इस चिड़िया के गले में सुनहरी धारी होती है, जो सूर्य की किरण पड़ते ही सोने जैसा चमकती है। रंग और लकीर की वजह से ही इसे ‘सोन चिरैया’ या ‘श्याम चिरैया’ कहा जाता है। इसकी पूंछ भी चोंच की तरह नुकीली होती है और जीभ काले नाग की तरह। अपनी लम्बी जीभ को सांप की तरह बाहर-भीतर कर वह फूलों का रस चूसती है। कभी फूलों की खेती करने वाले बांदा जनपद के खटेहटा गांव के बुजुर्ग मइयाद्दीन माली कहते हैं, ‘सोन चिरैया का आशियाना फुलवारी है। बुंदेलखंड में फूलों की खेती अब बहुत कम की जाती है। यही वजह है कि इन चिड़ियों की संख्या में कमी आई है।’वहीं कुछ बुद्धिजीवियों का कहना है, ‘गांवों से लेकर कस्बों तक दूरसंचार की विभिन्न कम्पनियों ने टावरों का जाल बिछा दिया है। इनसे निकलने वाली किरणों की चपेट में आकर बड़े पैमाने पर चिड़ियों की मौत हो रही है। ‘सोन चिरैया’ की संख्या में कमी की यह बहुत बड़ी वजह है।’
प्रस्तुति
गजाला खान
http://visharadtimes.com/
दुनिया के कुछ डरावने पर्यटन स्थल
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| GAZALA KHAN |
जब शौक घूमने का हो तो क्या देश और क्या विदेश। कुछ जगहों पर घूमने पर लोगों को इतिहास की याद ताजा हो जाती है तो कुछ जगहों पर जाने के लिए लोग भावनाओं में बह जाते है। आगरा ताज प्यार की निशानी है जिसे देखने के लिए लोग दुनिया के कोने-कोने से आत है। इन सबसे इतर दुनिया में कुछ जगह ऐसी भी है जहां जाने पर डर लगता है और ये जगहें अपने आप में विचित्र भी है। लेकिन फिर भी लोग यहां पर रोमांच के लिए घूमने जाते है। जिनमें से कुछ जगहें ये हैं-मटर म्यूजियम ऑफ मेडिकल हिस्टरी की स्थापना अमेरिका के फिलाडेल्फिया में 1858 में हुई थी।
यहां पर विचित्र प्रकार के पुराने चिकित्सकीय संसाधनों का कलक्शन है। यहां पर चिकित्सकीय विज्ञान से संबंधित कई ऐसे पुराने उपकरण रखे हुए है, जिनको देखने पर आश्चर्य होता है। इसके साथ ही यहां का सबसे डरावनी पहलू यह है कि यहां मानव खोपडियों का भी विशाल संग्रह है। जिसको देखने के लिए लोग डरावनी होने के बाद भी आते हैं।
मैक्सिको सिटी का सोनोरा मार्केट तंत्र-मंत्र और जादू-टोने के सामान मिलने के लिए प्रसिद्ध है।
जादू-टोने में विश्वास करने वाले लोगों को यहां पर विचित्र प्रकार की चीजों जैसे मानवी खोपड़ी नुमा संरचना वाली आकृति की खरीददारी करते हुए खूब देखा जा सकता है। इन प्रकार की आकृतियों को देखकर कई बार डर भी लगता है, लेकिन फिर भी यहां के लोग मान्यता होने की वजह से इस मार्केट में आते है। यहां पर मान्यता है कि इस प्रकार की चीजों को घर में रखना घर तथा परिवारक लिए शुभ होता है। इसके साथ ही यहां पर दुर्लभ किस्म की जड़ी-बूटियों के साथ ही सांप का खून तथा सुखाया हुआ हमिंगबर्ड भी मिलता है।
पिट केरियन द्वीप के पास स्थित ईस्टर आइसलैंड अपनी विचित्रता और डरावने स्थल के लिए दुनियाभर में मशहूर है। जरा आप कल्पना कीजिए कि आप जिधर भी देखे आपको दूर-दूर तक पत्थर के बुत ही नजर आए। इन्हें देखने पर मन में डर पैदा होना तो लाजमी ही है, लेकिन फिर भी देश-विदेश से पर्यटक यहां पर घूमने के लिए आते है। ईस्टर द्वीप दुनिया की सबसे रहस्यमय जगहों में से एक है। ईस्टर आइसलैंड का स्पेनिश नाम ष्इसला डी पैसकुआष् है। यहां पर जुलाई और अगस्त के महीनों में तापमान कम होने पर सबसे अधिक पर्यटक देखे जा सकते है।
अमेरिका के कैलिफोर्निया में स्थित विंचेस्ट हाउस का निर्माण 1884 में हुआ था। यह महल 38 साल में बनकर तैयार हुआ था। विंचेस्ट हाउस को भूत बंगले के तौर पर जाना जाता है। 160 कमरों वाला महलनुमा यह घर पर्यटकों को बरबस अपनी ओर आकर्षित करता है। जो लोग भूत-प्रेत में विश्वास करते है और जो नहीं भी करते दोनों तरह के लोग यहां पर मौज-मस्ती के लिए आते है। एक जमाने में यह सारा विंचेस्टर का घर था। लोगों का मानना है कि विंचेस्ट हाउस में सारा की आत्मा भटकती रहती है। विचेंस्ट हाउस के निर्माण में 1884 में करीब 55 लाख अमेरिकी डॉलर का खर्च आया था।
राजस्थान के देशनोक गांव का करणीमाता मंदिर 15वीं शताब्दी में बनकर तैयार हुआ था। इस मंदिर का मुख्य आकर्षण यहां पर खुले रूप से घूमने वाले चूहे है। इन चूहों को देखकर यहां आने वाले श्रद्धालुओं को अजीब तरह का डर भी लगता है। इस मंदिर में हजारों की संख्या में चूहे मुक्त रूप से घूमते रहते है, इन चूहों में कुछ सफेद चूहे भी है। सफेद चूहों को मान्यता से जोड़कर देखा जाता है। मंदिर के मुख्य द्वार पर लगा चांदी का विशालकाय गेट भी श्रद्धालुओं को खूब आकर्षित करता है। ब्रिटेन में स्थित मैरी किन वह स्थान है जहां की गलियां बीते दिनों की सच्चाइयों को उजागर करती है। यहां कभी प्लेग के शिकार लोगों को सडकों पर यूं ही लावारिस छोड़ दिया गया था और वे सही उपचार न मिलने के कारण तड़प-तड़प कर मर गए थे। अब यहां पर सैलानायों की भीड़ लगी रहती है। यूक्रेन के शेर्नोबिल में 26 अप्रैल, 1986 में हुई परमाणु सयंत्र दुर्घटना में हजारों लोग मारे गए थे। जिससे इसके आसपास का पूरा इलाका तहस-नहस हो गया था। दुर्घटना के बाद यह जगह पर्यटकों के लिए खोल दी गई थी। लोगों को यहां आकर उस भयावह त्रासदी की याद आ जाती है, लेकिन फिर भी पर्यटक यहां पर घूमने के लिए आते है।
प्रस्तुति
गजाला खान
http://visharadtimes.com/
Wednesday, October 12, 2011
दुनिया का सबसे छोटा कुत्ता छह इंच लंबा

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| Gazala Khan Managingeditor |
दुनिया के सबसे छोटे कुत्ते की लंबाई महज छह इंच है और ऊंचाई इससे भी कम। द सन की खबर के अनुसार ग्रासिया का वजन छह आउंस है जो गिनीज बुक आफ रिकार्ड में दर्ज ब्रांडी द चिह्वाह्वा के वजन से चार आउंस कम है। ग्रासिया बौना है क्योंकि कुत्तों की ऊंचाई सामान्य तौर पर कम से कम दस इंच होती है और ग्रासिया छह इंस से भी छोटा है। झुर्रियों वाले छोटे मुंह के इस कुत्ते की पूंछ मुड़ी हुई है। कई रंगों वाले इस कुत्ते का शरीर लेकिन काफी सुडौल है। ग्रासिया को जब उसके मालिक 61 वर्षीय सान्ड़ा डेवाल नारफोक ग्रेट यारमाउथ में घुमाने ले जाते हैं तो सबकी निगाह उस पर रहती है। सान्ड्रा कहते हैं हर कोई उसे देखकर रूक जाता है ,और उसका चक्कर लगाता है । लोगों द्वारा रुककर उस कुत्ता को देखना उन्हें अच्छा लगता है।
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